यहां शादी में उतरवा देते हैं दूल्हे के कपड़े, कहते हैं कि इससे उम्र भर खुश रहेंगे दुल्हा-दुल्हन परीक्षण के दौरान वर की नाक दबाई जाती है, जिसका उद्देश्य होता है यह जांचना कि कहीं वर स्वांस व मिर्गी रोग से ग्रस्त तो नहीं है। साथ ही इस दौरान शरीर से वस्त्र भी उतार दिया जाता है। एक तरफ जहां पूरी दुनिया में वैवाहिक जीवन असफल हो रहे हैं, वहीं मिथिला में आज के दौर में भी वैवाहिक जीवन सौ फीसद सफल है। इसका मूल राज यहां के समाज द्वारा वैवाहिक संस्कारों में वैज्ञानिक पद्धति को अपनाना माना जा रहा है। आज शहरों में मैरेज ब्यूरो या मैचिंग सेंटर के रूप में कई व्यावसायिक संस्थाएं खुल गई हैं जो शादी योग्य वर-वधू को एक दूसरे से जोडऩे का काम करती हैं। पर वह अपने स्तर पर कोई जांच-पड़ताल नहीं करती हैं। वहीं मिथिला में सदियों पहले इस तरह की संस्थाएं थीं जो नि:शुल्क काम कर रही थीं और पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति को अपनाती थी। आज भी मिथिला में वर-वधू के मातृ व पितृ पक्ष के सात पीढ़ी के बीच रक्त संबंधों का खयाल रखा जाता है। समगोत्री यानी समान रक्त पाए जाने पर शादी नहीं होती है। इसे आज के चिकित्सा विज्ञान ने भी...